2026 Kisan Credit Card: भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ के किसानों को खेती के लिए समय पर पैसों की सख्त जरूरत होती है। बीज खरीदना हो, खाद लानी हो या सिंचाई का इंतजाम करना हो हर काम के लिए नकद राशि चाहिए। लेकिन अधिकतर किसान साहूकारों के ऊँचे ब्याज के जाल में फँस जाते थे। इसी समस्या का समाधान करने के लिए भारत सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC योजना की शुरुआत की। यह योजना किसानों को बैंकिंग प्रणाली के जरिए सस्ता और आसान कर्ज दिलाने का एक मजबूत जरिया बन चुकी है।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई
किसान क्रेडिट कार्ड योजना को भारत सरकार ने नाबार्ड की सिफारिश पर 1998 में शुरू किया था। इस योजना का मकसद किसानों को एक ऐसी सुविधा देना था जिससे वे जरूरत पड़ने पर कभी भी पैसे निकाल सकें, ठीक उसी तरह जैसे कोई बैंक खाते से निकालता है। यह एक रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा है जिसमें किसान एक तय सीमा तक बार-बार ऋण ले सकता है और चुका सकता है। यह योजना देश के करोड़ों किसानों के लिए वरदान साबित हुई है।
साल 2004 में इस योजना को और व्यापक बनाया गया और इसमें कृषि से जुड़ी अन्य गतिविधियों जैसे पशुपालन और मछली पालन को भी शामिल किया गया। 2012 में एक कार्य समूह ने इसकी समीक्षा कर प्रक्रिया को और सरल बनाया। अब इलेक्ट्रॉनिक KCC कार्ड भी जारी किए जाते हैं जिससे किसान ATM के जरिए भी पैसे निकाल सकते हैं। यह योजना आज भी किसानों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही है।
KCC योजना में ब्याज दर और सरकारी सब्सिडी का लाभ
किसान क्रेडिट कार्ड योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम ब्याज दर है। भारत सरकार इस योजना के तहत किसानों को ब्याज पर 2 प्रतिशत की सब्सिडी देती है। इसके अलावा जो किसान समय पर अपना कर्ज चुकाते हैं, उन्हें 3 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलता है। इस तरह एक जिम्मेदार किसान को केवल लगभग 4 प्रतिशत सालाना ब्याज पर ऋण मिल सकता है जो बाजार दर से बहुत कम है।
बाजार में साहूकार या निजी कर्ज देने वाले 24 से 36 प्रतिशत तक ब्याज वसूलते हैं, जिससे किसान कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं। KCC योजना इस समस्या का स्थायी समाधान है। इसमें ₹3 लाख तक के अल्पकालिक कृषि ऋण पर ब्याज सब्सिडी मिलती है। समय पर भुगतान करने वाले किसानों को प्रोत्साहन देकर सरकार उन्हें वित्तीय अनुशासन के लिए भी प्रेरित करती है। यह एक ऐसी योजना है जो किसान और सरकार दोनों के लिए फायदेमंद है।
किसान क्रेडिट कार्ड के लिए पात्रता और योग्यता की शर्तें
KCC योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी पात्रता शर्तें होती हैं। सबसे पहले, आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसकी उम्र 18 से 75 वर्ष के बीच होनी चाहिए। खुद की जमीन पर खेती करने वाले किसान, बटाईदार किसान, किरायेदार किसान और स्वयं सहायता समूह से जुड़े किसान भी इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। छोटे और सीमांत किसान भी इस योजना का पूरा लाभ उठाने के हकदार हैं।
मछली पालन और पशुपालन से जुड़े लोग भी अब KCC के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऋण सीमा किसान की जमीन की मात्रा, उगाई जाने वाली फसल के प्रकार और उत्पादन की अनुमानित लागत के आधार पर तय की जाती है। बैंक अपने मानकों के अनुसार यह सीमा निर्धारित करता है। आम तौर पर फसल की लागत, फसल के बाद के खर्च और रखरखाव के खर्च को जोड़कर कुल ऋण सीमा बनाई जाती है।
किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवश्यक दस्तावेज़
KCC के लिए आवेदन करते समय कुछ जरूरी कागजात बैंक में जमा करने होते हैं। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, जमीन की खतौनी या भूमि रिकॉर्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और मोबाइल नंबर प्रमुख हैं। इसके अलावा बैंक द्वारा भरा हुआ आवेदन पत्र, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) और निवास प्रमाण पत्र भी मांगा जा सकता है। अलग-अलग बैंकों की जरूरतें थोड़ी अलग हो सकती हैं।
यदि किसान बटाईदार है यानी वह दूसरे की जमीन पर खेती करता है, तो उसे जमीन मालिक से एक अनापत्ति पत्र या समझौते की प्रति भी देनी पड़ सकती है। मछली पालन या पशुपालन के लिए KCC लेने वाले किसानों को उससे संबंधित प्रमाण जैसे पट्टा, लाइसेंस या पंजीकरण दस्तावेज देने होते हैं। दस्तावेज पूरे और सही होने पर बैंक जल्दी ऋण स्वीकृत करता है।
किसान क्रेडिट कार्ड के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया
KCC के लिए आवेदन करना बेहद आसान है। ऑफलाइन तरीके से किसान अपने नजदीकी सरकारी बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा या किसी सहकारी बैंक में जाकर फॉर्म भर सकते हैं। बैंक अधिकारी किसान की जरूरत समझकर ऋण सीमा तय करता है और दस्तावेज सही होने पर कार्ड जारी किया जाता है।
ऑनलाइन आवेदन के लिए किसान संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर KCC सेक्शन में फॉर्म भर सकते हैं। पीएम किसान पोर्टल पर भी KCC के लिए आवेदन की सुविधा उपलब्ध है। आवेदन स्वीकृत होने के बाद किसान को एक रूपे डेबिट कार्ड दिया जाता है जिसे वह ATM या बैंक शाखा में उपयोग कर सकता है। यह प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और किसान के अनुकूल है।
KCC योजना के फायदे और इसका किसानों पर प्रभाव
किसान क्रेडिट कार्ड ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदली है। इस कार्ड से किसान जरूरत के अनुसार पैसे निकाल सकते हैं और फसल बेचने के बाद वापस जमा कर सकते हैं। इस लचीलेपन की वजह से किसान बिना किसी दबाव के अपना कर्ज समय पर चुका पाते हैं। इसके अलावा KCC धारक किसानों को फसल बीमा योजना और दुर्घटना बीमा का लाभ भी मिलता है जो उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा देता है।
KCC ने किसानों को साहूकारों के चंगुल से बाहर निकाला है और उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार देश में करोड़ों किसान इस योजना से जुड़ चुके हैं। इस कार्ड की वैधता 5 साल होती है और सालाना समीक्षा के बाद इसे नवीनीकृत किया जाता है। यह योजना किसान की आय बढ़ाने और उसे आर्थिक रूप से सशक्त करने में अहम भूमिका निभा रही है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसान क्रेडिट कार्ड योजना से जुड़े नियम, ब्याज दर, पात्रता और दस्तावेज समय-समय पर बदल सकते हैं। सटीक और अद्यतन जानकारी के लिए अपने नजदीकी बैंक शाखा या भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल से संपर्क करें।





