SBI Bank New Rules: अगर आप भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के खाताधारक हैं तो यह जानकारी आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हाल के दिनों में बैंक ने कई नए नियम और शुल्क लागू किए हैं जिनकी जानकारी न होने पर आपके खाते से अचानक पैसे कट सकते हैं। कई ग्राहकों को तब पता चलता है जब उनके खाते से पहले ही कटौती हो चुकी होती है। इसलिए समय रहते इन नियमों को समझना और जरूरी कदम उठाना बेहद जरूरी है ताकि आपकी मेहनत की कमाई बेवजह खर्च न हो।
एसबीआई भारत का सबसे बड़ा सरकारी बैंक है और करोड़ों लोग इस पर भरोसा करते हैं। लेकिन बैंकिंग सेवाओं में बदलाव के साथ कई छिपे हुए चार्ज भी सामने आ रहे हैं। डेबिट कार्ड से लेकर एटीएम ट्रांजेक्शन तक हर जगह नए शुल्क लागू हो रहे हैं। अगर आप इन बदलावों के बारे में सतर्क नहीं रहेंगे तो हर महीने आपकी जेब से अनजाने में पैसे निकलते रहेंगे। आइए विस्तार से जानते हैं कि क्या हैं ये नए नियम और आप कैसे अपने आप को इनसे बचा सकते हैं।
डेबिट कार्ड पर लगने वाला वार्षिक रखरखाव शुल्क
एसबीआई अब ज्यादातर डेबिट कार्ड पर सालाना मेंटेनेंस चार्ज वसूल रहा है। यह शुल्क कार्ड के प्रकार के आधार पर 125 रुपये से लेकर 200 रुपये तक हो सकता है। इसके अलावा इस राशि पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी जुड़ जाती है जिससे कुल कटौती 147 रुपये से 236 रुपये के बीच हो सकती है। यह चार्ज आमतौर पर उस महीने काटा जाता है जब आपका कार्ड जारी हुआ था। कई ग्राहकों को इस कटौती की जानकारी तक नहीं होती और वे हैरान रह जाते हैं।
खास बात यह है कि अगर आप अपने डेबिट कार्ड का नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं करते हैं तो भी यह चार्ज लागू होता है। बहुत से लोग कार्ड बनवाने के बाद इसे भूल जाते हैं या सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सालाना चार्ज एक अनावश्यक बोझ बन जाता है। अगर आपके पास एक से ज्यादा डेबिट कार्ड हैं जिनका आप इस्तेमाल नहीं करते तो बेहतर होगा कि उन्हें तुरंत बंद करवा दें। इससे आप हर साल सैकड़ों रुपये बचा सकते हैं।
एटीएम से पैसे निकालने पर लगने वाला चार्ज
एसबीआई ने एटीएम ट्रांजेक्शन की एक मासिक सीमा तय कर दी है। अगर आप इस सीमा से अधिक बार एटीएम से पैसे निकालते हैं तो हर अतिरिक्त निकासी पर आपको 10 से 20 रुपये का चार्ज देना पड़ेगा। इसके अलावा इस शुल्क पर भी जीएसटी लागू होती है। आमतौर पर बैंक हर महीने 3 से 5 फ्री ट्रांजेक्शन की अनुमति देता है जिसके बाद चार्ज लगना शुरू हो जाता है। यह नियम खासतौर पर उन लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है जो बार-बार थोड़ी-थोड़ी रकम निकालते हैं।
अगर आप किसी दूसरे बैंक के एटीएम से पैसे निकालते हैं तो यह चार्ज और भी ज्यादा हो सकता है। महानगरों में यह शुल्क अलग है और छोटे शहरों या गांवों में अलग। इसलिए सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप महीने की शुरुआत में ही अपनी जरूरत का अनुमान लगाएं और एक या दो बार में ही जरूरी नकदी निकाल लें। इससे न सिर्फ आपका समय बचेगा बल्कि अनावश्यक चार्ज से भी बचाव होगा। एटीएम कार्ड का सही इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है।
mCASH सुविधा बंद होने का असर
एसबीआई की mCASH सेवा जो ग्राहकों को बिना डेबिट कार्ड के एटीएम से पैसे निकालने की सुविधा देती थी, अब दिसंबर 2025 से बंद हो चुकी है। यह सुविधा उन लोगों के लिए काफी उपयोगी थी जो कभी कार्ड भूल जाते थे या आपातकालीन स्थिति में पैसों की जरूरत होती थी। mCASH के जरिए मोबाइल बैंकिंग ऐप से एक कोड जनरेट करके एटीएम से पैसे निकाले जा सकते थे। लेकिन अब इस सुविधा के बंद होने से ग्राहकों को वैकल्पिक तरीके अपनाने होंगे।
अब आपको UPI, IMPS, NEFT जैसे डिजिटल भुगतान के तरीकों पर ज्यादा निर्भर रहना होगा। ये सभी तरीके तेज और सुरक्षित हैं लेकिन इनके लिए इंटरनेट कनेक्शन जरूरी है। अगर आप अभी तक डिजिटल बैंकिंग से परिचित नहीं हैं तो यह सही समय है कि आप इन सेवाओं को सीखें और इस्तेमाल करना शुरू करें। बैंक भी अब कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा दे रहा है इसलिए आने वाले समय में ऐसे और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
बड़ी नकदी जमा पर सख्त निगरानी
एसबीआई समेत सभी बैंकों को अब इनकम टैक्स विभाग के निर्देशानुसार बड़ी नकदी जमा पर कड़ी नजर रखनी होती है। अगर आप एक वित्तीय वर्ष में अपने खाते में 10 लाख रुपये या उससे अधिक नकद जमा करते हैं तो बैंक इसकी सूचना टैक्स विभाग को देता है। यह नियम काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए बनाया गया है। लेकिन कई बार वैध लेनदेन करने वाले ईमानदार ग्राहकों को भी इसका सामना करना पड़ता है।
खासतौर पर शादी-विवाह, संपत्ति खरीदने या किसी बड़े खर्च के समय लोग बड़ी रकम जमा करते हैं। ऐसे में अगर आपके पास इस रकम का सही स्रोत और दस्तावेज नहीं हैं तो आयकर विभाग से नोटिस आ सकता है। इसलिए बेहतर है कि आप हर लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड संभाल कर रखें। जब भी बड़ी रकम जमा करें तो उसके स्रोत की जानकारी बैंक को दें। चेक या ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए लेनदेन करना ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी होता है।
SMS अलर्ट और अन्य सेवाओं के चार्ज
कई ग्राहकों को यह जानकारी नहीं होती कि एसबीआई कुछ खास सेवाओं के लिए अलग से चार्ज लेता है। इनमें SMS अलर्ट सेवा, चेक बुक जारी करना, पासबुक प्रिंटिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। SMS अलर्ट के लिए तिमाही या वार्षिक शुल्क लिया जाता है जो खाते के प्रकार पर निर्भर करता है। अगर आपने यह सेवा एक बार एक्टिवेट कर दी है तो यह चार्ज नियमित रूप से कटता रहता है चाहे आप इसका इस्तेमाल करें या नहीं।
बेहतर यह है कि आप अपने बैंक स्टेटमेंट में हर महीने कटने वाले सभी चार्जेज की लिस्ट बनाएं। जिन सेवाओं का आप नियमित इस्तेमाल नहीं करते उन्हें बंद करवा दें। आजकल मोबाइल बैंकिंग ऐप से सभी ट्रांजेक्शन की जानकारी मिल जाती है इसलिए SMS अलर्ट की जरूरत भी कम हो गई है। ऐसे छोटे-छोटे चार्ज मिलकर साल भर में एक बड़ी रकम बन जाते हैं जो आप बचा सकते हैं।
अपने बैंक खाते की सुरक्षा कैसे करें
सबसे पहली और जरूरी बात यह है कि आप हर महीने अपना बैंक स्टेटमेंट जरूर चेक करें। इससे आपको पता रहेगा कि कहां से और कितनी रकम कट रही है। अगर कोई अनजान या संदिग्ध कटौती दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। कई बार गलत चार्ज भी लग जाता है जिसे बैंक सुधार देता है। नियमित निगरानी से आप धोखाधड़ी से भी बच सकते हैं। आपका बैंक खाता आपकी आर्थिक सुरक्षा का आधार है इसलिए इसे लेकर लापरवाही बिल्कुल न बरतें।
दूसरा महत्वपूर्ण कदम यह है कि अपनी बैंकिंग सेवाओं को सरल बनाएं। जितनी कम सेवाएं होंगी उतना कम चार्ज लगेगा। अगर आपके पास एक से ज्यादा अकाउंट हैं जिनका आप इस्तेमाल नहीं करते तो उन्हें बंद करवा दें। इसी तरह अतिरिक्त डेबिट कार्ड, चेक बुक या अन्य सुविधाएं जो जरूरी नहीं हैं उन्हें भी समाप्त कर दें। मिनिमम बैलेंस की शर्त भी ध्यान में रखें क्योंकि इसे पूरा न करने पर भी पेनल्टी लगती है। थोड़ी सतर्कता और समझदारी से आप हर साल हजारों रुपये बचा सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। एसबीआई की नीतियां और शुल्क समय-समय पर बदल सकते हैं। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले कृपया अपनी स्थानीय एसबीआई शाखा से संपर्क करें या आधिकारिक वेबसाइट पर नवीनतम जानकारी प्राप्त करें। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की हानि या क्षति के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।





