आज से 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर नए नियम लागू UPI Payment Rules

By: Olivia

On: February 18, 2026 10:59 AM

UPI Payment Rules

UPI Payment Rules: डिजिटल भुगतान के इस दौर में UPI भारत की सबसे लोकप्रिय पेमेंट विधि बन चुकी है। रोजमर्रा की छोटी-मोटी खरीदारी से लेकर बड़े बिल भुगतान तक, लाखों लोग हर दिन UPI का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 2000 रुपये से अधिक के कुछ खास ट्रांजैक्शन को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से वॉलेट आधारित मर्चेंट पेमेंट्स से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है।

अगर आप भी PhonePe, Google Pay जैसे ऐप्स के जरिए नियमित रूप से पेमेंट करते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। हालांकि अच्छी खबर यह है कि व्यक्तिगत लेनदेन यानी पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्या है यह नया नियम और इसका आम उपभोक्ताओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

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UPI पेमेंट में क्या बदलाव हुआ है – समझें सरल भाषा में

NPCI ने साफ कर दिया है कि अगर आप अपने दोस्तों, परिवार या रिश्तेदारों को UPI के माध्यम से पैसे भेजते हैं, तो वह लेनदेन पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। चाहे आप 500 रुपये भेजें या 50,000 रुपये, पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। यह बदलाव केवल वॉलेट-लोडेड मर्चेंट पेमेंट्स पर लागू होता है। जब कोई ग्राहक किसी दुकानदार या व्यापारी को 2000 रुपये से अधिक की राशि वॉलेट के जरिए भुगतान करता है, तो उस पर 1.1% तक का शुल्क लगेगा।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं वसूला जाएगा, बल्कि मर्चेंट को यह चार्ज देना होगा। उदाहरण के लिए, अगर आप किसी दुकान पर 5000 रुपये का भुगतान अपने PhonePe या Google Pay वॉलेट से करते हैं, तो दुकानदार को लगभग 55 रुपये का शुल्क देना होगा। लेकिन अगर आप सीधे अपने बैंक खाते से UPI पेमेंट करते हैं तो कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। यह नियम केवल वॉलेट मोड में किए गए बड़े व्यावसायिक भुगतान पर ही लागू होता है।

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UPI की ट्रांजैक्शन लिमिट में क्या-क्या बदलाव किए गए

सामान्य UPI लेनदेन की दैनिक सीमा 1 लाख रुपये बनी हुई है, जो अधिकांश उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त है। हालांकि, कुछ विशेष श्रेणियों में इस सीमा को बढ़ा दिया गया है। शिक्षा से जुड़े शुल्क भुगतान, अस्पताल के बिल, बीमा प्रीमियम और IPO में निवेश जैसी श्रेणियों के लिए दैनिक सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे माता-पिता आसानी से अपने बच्चों की बड़ी फीस का भुगतान कर सकेंगे और मरीजों को बड़े मेडिकल बिल चुकाने में सुविधा होगी।

इसके अलावा, कुछ खास पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) कैटेगरी में दैनिक लिमिट को 10 लाख रुपये तक बढ़ाया गया है। यह व्यवसायियों और बड़े लेनदेन करने वाले उपभोक्ताओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। अधिकांश बैंक अभी भी प्रतिदिन लगभग 20 ट्रांजैक्शन की सीमा बनाए हुए हैं, हालांकि यह सीमा बैंक के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है। यह नई लिमिट्स डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूत करने और बड़े भुगतानों को आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

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आम ग्राहकों के लिए क्या है राहत की बात

सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि छोटे और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं पर इस नियम का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। अगर आप सब्जी विक्रेता को 500 रुपये दे रहे हैं, किराने की दुकान पर 1500 रुपये का बिल चुका रहे हैं, या दोस्त को 3000 रुपये भेज रहे हैं – इन सभी स्थितियों में आपको कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। व्यक्तिगत लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे और दैनिक खर्चों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

यहां तक कि अगर आप 2000 रुपये से अधिक का भुगतान भी करते हैं, तो वह शुल्क मर्चेंट द्वारा वहन किया जाएगा, न कि आपके द्वारा। इसका मतलब है कि आपकी जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। बस ध्यान रखें कि सीधे बैंक अकाउंट से UPI करना वॉलेट से बेहतर विकल्प रहेगा, खासकर बड़े भुगतान के मामले में। यह बदलाव मुख्य रूप से व्यवसायियों और बड़े मर्चेंट्स को प्रभावित करेगा, जो नियमित रूप से बड़ी राशि के लेनदेन करते हैं।

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व्यापारियों और दुकानदारों पर क्या होगा असर

छोटे और मध्यम दर्जे के व्यापारियों को अब अपने पेमेंट सिस्टम को बेहतर ढंग से प्रबंधित करना होगा। जो मर्चेंट वॉलेट-बेस्ड पेमेंट स्वीकार करते हैं, उन्हें 2000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 1.1% चार्ज देना होगा। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई ग्राहक 10,000 रुपये का सामान खरीदता है और वॉलेट से भुगतान करता है, तो व्यापारी को लगभग 110 रुपये का शुल्क देना होगा। यह व्यापारियों के लिए अतिरिक्त लागत होगी, जिसे वे अपने मार्जिन में समायोजित करने का प्रयास करेंगे।

हालांकि, इस बदलाव का एक सकारात्मक पहलू यह है कि व्यापारी अब ग्राहकों को सीधे बैंक अकाउंट से भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं, जिस पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं है। बड़े व्यवसायों को उच्च ट्रांजैक्शन लिमिट का लाभ मिलेगा, जिससे वे आसानी से बड़े ऑर्डर और भुगतान स्वीकार कर सकेंगे। दीर्घकालिक रूप से, यह नियम डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को अधिक संगठित और व्यवस्थित बनाएगा, जो सभी के लिए फायदेमंद होगा।

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NPCI के इस फैसले के पीछे क्या है मकसद

NPCI का मुख्य उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और टिकाऊ बनाना है। बड़े वॉलेट आधारित लेनदेन पर शुल्क लागू करने से सिस्टम में बेहतर संतुलन बना रहेगा और प्रोसेसिंग की लागतों को व्यवस्थित किया जा सकेगा। इससे धोखाधड़ी और फर्जी ट्रांजैक्शन पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा। साथ ही, बड़े लेनदेन की बेहतर मॉनिटरिंग से टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

यह कदम डिजिटल इंडिया अभियान को मजबूती देने और देश में कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। छोटे उपभोक्ताओं को बिना किसी अतिरिक्त बोझ के डिजिटल पेमेंट की सुविधा मिलती रहेगी, जबकि बड़े लेनदेन अधिक व्यवस्थित और ट्रैक करने योग्य होंगे। NPCI ने यह सुनिश्चित किया है कि यह बदलाव आम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए किया गया है और भविष्य में डिजिटल भुगतान ढांचे को और मजबूत बनाने में मददगार साबित होगा।

अब क्या करें – आपके लिए उपयोगी टिप्स

अगर आप नियमित UPI यूजर हैं तो बड़े भुगतान के लिए सीधे बैंक अकाउंट से पेमेंट करना बेहतर विकल्प रहेगा, न कि वॉलेट से। व्यक्तिगत भुगतान के लिए कोई चिंता की बात नहीं है – वे पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। अपने UPI ऐप में बैंक अकाउंट को डिफॉल्ट पेमेंट मोड के रूप में सेट करें ताकि बड़े ट्रांजैक्शन में कोई परेशानी न हो। छोटे भुगतान के लिए आप वॉलेट या बैंक अकाउंट, कोई भी तरीका अपना सकते हैं।

व्यापारियों को सलाह दी जाती है कि वे ग्राहकों को बैंक अकाउंट से सीधे भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित करें, जिससे उन्हें अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सके। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले अपने बैंक या UPI सेवा प्रदाता से नवीनतम जानकारी जरूर लें। याद रखें कि यह बदलाव डिजिटल भुगतान को बेहतर बनाने के लिए किया गया है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। बस थोड़ी जागरूकता के साथ आप आसानी से इन नए नियमों के साथ तालमेल बिठा सकते हैं।

Disclaimer: यह लेख आधिकारिक स्रोतों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले कृपया संबंधित बैंक, NPCI की आधिकारिक वेबसाइट या अपने UPI सेवा प्रदाता से सीधे जानकारी की पुष्टि अवश्य करें। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की हानि या नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

Olivia Grace is a writer and editor at a leading news website. She covers government schemes, latest news, technology, and automobiles. Known for her clear and reliable writing, she focuses on delivering accurate and easy-to-understand information to readers.

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