UPI Rules Changed: भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और अब करोड़ों लोग रोजमर्रा के लेनदेन के लिए UPI पर निर्भर हैं। ऐसे में 14 फरवरी 2026 से लागू हुए नए UPI नियम यूजर्स के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद बनाने के लिए कई तकनीकी बदलाव लागू किए हैं। ये नए नियम सिर्फ ट्रांजैक्शन प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि यूजर एक्सपीरियंस और फ्रॉड प्रोटेक्शन पर भी सीधा असर डालेंगे।
नए अपडेट के तहत बैलेंस चेक लिमिट, API रिस्पॉन्स टाइम, ऑटोपे प्रोसेसिंग टाइम और इनएक्टिव UPI ID से जुड़े नियम बदले गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य सर्वर लोड कम करना और ट्रांजैक्शन फेल होने की समस्या को घटाना है। अगर आप भी रोजाना UPI ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो इन नए नियमों को समझना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी परेशानी से बचा जा सके।
UPI Rules Changed 2026: बैलेंस चेक और अकाउंट एक्सेस लिमिट
नए नियमों के अनुसार अब कोई भी यूजर एक UPI ऐप से दिन में अधिकतम 50 बार ही बैलेंस चेक कर सकेगा। पहले इस पर कोई तय सीमा नहीं थी, जिसके कारण सर्वर पर अनावश्यक लोड बढ़ जाता था। यदि आपके मोबाइल में दो अलग-अलग UPI ऐप इंस्टॉल हैं, तो हर ऐप पर अलग-अलग लिमिट लागू होगी। इसका मतलब है कि आप एक ऐप में 50 बार और दूसरे ऐप में भी 50 बार बैलेंस चेक कर सकते हैं।
इसी तरह List Account API के जरिए लिंक्ड बैंक अकाउंट देखने की सीमा 25 बार तय कर दी गई है। यह बदलाव सिस्टम को ऑप्टिमाइज़ करने के लिए किया गया है ताकि बार-बार रिक्वेस्ट से सर्वर स्लो न हो। खासकर उन यूजर्स के लिए यह जरूरी सूचना है जो दिन में कई बार बैलेंस चेक करते हैं या बैंक अकाउंट बदलते रहते हैं। अब उन्हें अपनी उपयोग आदतों में थोड़ा बदलाव करना होगा।
ऑटोपे ट्रांजैक्शन और टाइम स्लॉट से जुड़े नए नियम
UPI ऑटोपे फीचर का इस्तेमाल आजकल सब्सक्रिप्शन, EMI, OTT प्लेटफॉर्म और बिल पेमेंट के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। नए नियमों के तहत ऑटोपे ट्रांजैक्शन अब सिर्फ नॉन-पीक आवर्स में प्रोसेस किए जाएंगे। इसका मतलब है कि व्यस्त समय जैसे सुबह या शाम के दौरान सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव कम रहेगा और जरूरी ट्रांजैक्शन तेज़ी से पूरे होंगे।
इसके अलावा किसी एक ऑटोपे रिक्वेस्ट पर अधिकतम चार प्रयास ही किए जाएंगे। यदि चार बार में भुगतान सफल नहीं होता है, तो रिक्वेस्ट स्वतः असफल मानी जाएगी। इससे बार-बार होने वाले फेल ट्रांजैक्शन कम होंगे और बैंक सर्वर पर अनावश्यक लोड नहीं पड़ेगा। खासकर व्यापारियों और फ्रीलांसरों को अब अपने ऑटो पेमेंट शेड्यूल को इन समय स्लॉट के अनुसार सेट करना होगा।
इनएक्टिव UPI ID और सिक्योरिटी अपडेट
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि किसी यूजर की UPI ID 12 महीने तक इस्तेमाल नहीं हुई है, तो उसे स्वतः डिएक्टिवेट कर दिया जाएगा। यह बदलाव सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय तक निष्क्रिय ID फ्रॉड का जोखिम बढ़ा सकती है। मोबाइल नंबर री-असाइनमेंट की स्थिति में भी यह नियम उपयोगी रहेगा, जिससे गलत व्यक्ति को भुगतान भेजने का खतरा कम होगा।
इस नियम का उद्देश्य डिजिटल पेमेंट सिस्टम को सुरक्षित बनाना है। अगर आपकी कोई पुरानी UPI ID है जिसका उपयोग आप नहीं करते, तो बेहतर होगा कि उसे समय-समय पर एक्टिव रखें या हटवा दें। इससे भविष्य में किसी भी सुरक्षा जोखिम से बचा जा सकता है। साथ ही यह कदम यूजर डेटा की सुरक्षा और नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद करेगा।
API रिस्पॉन्स टाइम और सर्वर परफॉर्मेंस में सुधार
नई गाइडलाइन के तहत जरूरी API का रिस्पॉन्स टाइम अब अधिकतम 10 सेकंड तय किया गया है, जबकि पहले यह सीमा लगभग 30 सेकंड तक हो सकती थी। यह बदलाव रियल-टाइम पेमेंट अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया गया है। कम रिस्पॉन्स टाइम का मतलब है कि ट्रांजैक्शन जल्दी प्रोसेस होंगे और यूजर को इंतजार कम करना पड़ेगा।
यह सुधार खासतौर पर त्योहारों, ऑनलाइन सेल या पीक शॉपिंग सीजन के दौरान उपयोगी साबित होगा जब लाखों लोग एक साथ भुगतान करते हैं। पहले ऐसी स्थिति में ट्रांजैक्शन फेल या पेंडिंग हो जाते थे। अब बेहतर सर्वर क्षमता और तेज API प्रतिक्रिया से डिजिटल पेमेंट का अनुभव ज्यादा स्मूद और भरोसेमंद होगा, जिससे यूजर्स का विश्वास भी बढ़ेगा।
नए नियमों का असर यूजर्स और डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर
इन बदलावों का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ट्रांजैक्शन फेल होने की समस्या में कमी आएगी और सिस्टम ओवरलोड की स्थिति कम होगी। डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है, इसलिए नेटवर्क को मजबूत बनाना जरूरी था। नए नियम अनावश्यक रिक्वेस्ट कम करेंगे, जिससे बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव घटेगा और सिस्टम ज्यादा स्थिर रहेगा।
हालांकि बार-बार बैलेंस चेक करने वाले यूजर्स को थोड़ी असुविधा हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह नियम सभी के लिए फायदेमंद साबित होंगे। भविष्य में प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लाइन जैसी सुविधाएं भी UPI के जरिए उपलब्ध होंगी, जिससे डिजिटल लोन और ओवरड्राफ्ट लेना आसान हो जाएगा। इस तरह ये बदलाव सिर्फ वर्तमान ही नहीं बल्कि आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखकर किए गए हैं।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। नियम समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने बैंक या आधिकारिक प्लेटफॉर्म से पुष्टि अवश्य करें।





